प्रात: काल उठने के बाद मुख साफ़ करने के लिए कुल्ले किये जाते हैं । दातुन , मंजन के बाद भी कुल्ले करने जरूरी हैं । हर बार खाने पीने के बाद मुँह को दाँतो व मसूढ़ों को साफ़ रखने के लिए कुल्ले अवश्य ही करने चाहिएँ । शास्त्रों में गडूष का विधान है । कहा गया है :
"द्वादश: गण्डूषहि मुखशुद्धि विधीयते ।"
कम से कम बारह कुल्ले करें तो मुखशुद्धि होती है । शायद ऋषियों को इस बात का आभास होगा कि बारह बार कुल्ला करने के बाद , शायद दांतों में चिपके हुए सभी अन्नकण बाहर निकल जाएंगे और मुख पूरी तरह साफ़ हो जाएगा । इससे दांतों में कीड़े भी नहीं लगेंगे और फलत: दांत आजीवन साथ देंगे ।
"द्वादश: गण्डूषहि मुखशुद्धि विधीयते ।"
कम से कम बारह कुल्ले करें तो मुखशुद्धि होती है । शायद ऋषियों को इस बात का आभास होगा कि बारह बार कुल्ला करने के बाद , शायद दांतों में चिपके हुए सभी अन्नकण बाहर निकल जाएंगे और मुख पूरी तरह साफ़ हो जाएगा । इससे दांतों में कीड़े भी नहीं लगेंगे और फलत: दांत आजीवन साथ देंगे ।
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